Whats new

गौरव, शिवांश सहित 25 बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार की घोषणा

 GAURAV

महाराष्ट्र के गौरव सहस्रबुद्धे सहित कुल 25 बच्चों को इस वर्ष के राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। भारतीय बाल कल्याण परिषद में वर्ष 2015 के राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के लिए तीन बच्चियों सहित कुल 25 बहादुर बच्चों के नामों की घोषणा की गई।. इनमें से गौरव सहस्रबुद्धे और उत्तर प्रदेश के 13 वर्षीय शिवांश सिंह को मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। इन सभी बच्चों को 24 जनवरी 2016 को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित किया जाएगा तथा सभी बच्चे गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा भी लेंगे। महाराष्ट्र के नागपुर के दिवंगत 15 वर्षीय गौरव सहस्त्रबुद्धे को मरणोपरांत सर्वोच्च भारत पुरस्कार से सुशोभित किया जाएगा। बहादुर गौरव के स्थान पर उनके माता-पिता यह पुरस्कार ग्रहण करेंगे।

स्कूल बस की ट्रेन से टक्कर में दो बहुमूल्य जिंदगी बचाने वाली तेलंगाना की 9 वर्षीय शिवमपेट रुचिता को गीता चोपड़ा पुरस्कार जबकि अपनी मां की जिंदगी बचाने के लिए बाघ से भिड़ जाने वाले उत्तराखंड के अर्जुन सिंह (16) को संजय चोपड़ा पुरस्कार दिया जाएगा।

डूब रही दो महिलाओं को बचाने वाले केरल के एरोमल एसएम (12), बिजली की चपेट में आये दो लोगों को बचाने वाले मिजोरम के रामदिनथारा (15), कुएं में गिरे एक लड़के को बचाने वाले गुजरात के राकेशभाई शनाभाई पटेल को प्रतिष्ठित बापू गैधानी पुरस्कार दिया जाएगा।

बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए अन्य बच्चों में नीलेश रेवाराम भिल (महाराष्ट्र), कशिश धनानी (गुजरात), वैभव रामेश्वर घंगारे (महाराष्ट्र), दिशांत मेहंदीरत्ता (हरियाणा), चोंगथाम कुबेर मेतैई (मणिपुर), एंजेलिका टिनसांग (मेघालय), मोहित महेंद्र दलवी (महाराष्ट्र), नितिन फिलिप मैथ्यू (केरल), सर्वान्द साहा (छत्तीसगढ़), बीधोवन (केरल), आनंदु दिलीप (केरल), मॉरिस येंगखाम (मणिपुर), अभिजीत केवी (केरल), साईं कृष्णा अखिल किलाम्बी (तेलंगाना), मोहम्मद शमनाद (केरल), अबिनाश मिश्रा (ओडिशा), शिवांश सिंह (उत्तर प्रदेश) शामिल हैं।

इन पुरस्कारों के बारें मे
राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार भारत में हर वर्ष 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर बहादुर बच्चों को दिए जाते हैं। भारतीय बाल कल्याण परिषद ने 1957 में ये पुरस्कार शुरु किये थे। पुरस्कार के रूप में एक पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि दी जाती है। सभी बच्चों को विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने तक वित्तीय सहायता भी दी जाती है। 26 जनवरी के दिन ये बहादुर बच्चे हाथी पर सवारी करते हुए गणतंत्र दिवस परेड में सम्मिलित होते हैं। इन पुरस्कारों में निम्न पाँच पुरस्कार सम्मिलित हैं -
भारत पुरस्कार, (1987 से)
गीता चोपड़ा पुरस्कार, (1978 से)
संजय चोपड़ा पुरस्कार, (1978 से)
बापू गैधानी पुरस्कार, (1988 से)
सामान्य राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार, (1957 से)
भारतीय बाल कल्याण परिषद के प्रायोजित कार्यक्रम के अंतर्गत विजेताओं को तब तक वित्तीय सहायता दी जाती है जब तक उनकी स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं होती। कुछ राज्य सरकारें भी वित्तीय सहायता देती हैं। इंदिरा गांधी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत आईसीसीडब्ल्यू उन बच्चों को वित्तीय सहायता देती है जो इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई करते हैं। अन्य बच्चों को यह सहायता उनकी स्नातक शिक्षा पूरी होने तक दी जाती है। भारत सरकार ने विजेता बच्चों के लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज तथा पोलीटेक्नीक में कुछ सीटें आरक्षित कर रखी हैं। वीरता पुरस्कारों के लिए चयन उच्च अधिकार प्राप्त समिति करती है जिसमें विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन और भारतीय बाल कल्याण परिषद के वरिष्ठ सदस्य शामिल होते हैं।