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1950 से लेकर अब तक कौन-कौन से मेहमान बनें 26 जनवरी की शान

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26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर होने वाले परेड में कई देशों के प्रमुख हमारे मुख्य अतिथि बनें हैं। इस साल हमारे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्र पति ओलांद हैं।. गणतंत्र दिवस के मौके पर कई देश ऐसे हैं जिन्हें कई बार मौका मिला है और कई देश ऐसे हैं जो एक ही बार इस अवसर पर शामिल हुए हैं।. 26 जनवरी के मौके पर साल 1950 से ही विदेशी प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपति और राजाओं को बुलाने का रिवाज़ रहा है। 1950 से 1954 के बीच गणतंत्र दिवस का समारोह कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में हुआ था। 1955 से राजपथ पर परेड की शुरूआत हुई। हर साल अगल-अगल देशों से विदेश रणनीति के तहत अच्छे संबंध बनाने हेतु अलग लग प्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया जाने लगा। पाकिस्तान, चीन के अलावा क से अधिक बार बुलाये जाने वाले देशों में पड़ोसी राज्य भूटान, श्रीलंका और मोरिशियस के अलावा रूस, फ़्रांस व ब्रिटेन रहे हैं। ब्राज़ील और नाईजीरिया, इंडोनेशिया और यूगोस्लाविया भी एक से ज्यादा बार परेड का हिस्सा बन चुके हैं। सबसे ज्यादा बार फ़्रांस से आए अतिथि गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्सा बनें। सबसे पहले अतिथि साल 1950 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो भारतीय गणतंत्र के पहले मेहमान बनें। उसके बाद 1954 में भूटान के राजा राजा जिग्मे डोरजी मुख्य अतिथि बनें। 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद राजपथ पर परेड के पहले अतिथि बनें। जबकि 1958 में चीन के मार्शल ये यिआनयिंग और 1960 में रुस के राष्ट्रपति किल्मेंट वोरोशिलोव मुख्य अतिथि बनें । 1961 में ब्रिटेनकी महारानी रानी एलिज़ाबेथ II गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि बनीं। जबकि 1963 में कम्बोडिया के राजा नोरोडोम सिहानाउक और 1965 में पाकिस्तान के कृषि मंत्री राणा अब्दुल हमिद मुख्य अतिथि बनें। 1968 में रुस के प्रधानमंत्री एलेक्ज़ेई कोसिजिन, 1969 में बुल्गारिया के प्रधानमंत्री तोदोर ज़िवकोव और 1971 में तन्जानिया के राष्ट्रपति जूलियस तन्ज़ानिया मुख्य अतिथि बनें। 1972 में मोरिशियस के सीवोसगूर रामगुलम -1973 में जायरे के मोबुतु सेसे सेको -1974 में युगोस्लाविया के राष्ट्रपति राष्ट्रपति टीटो -1975 में जाम्बिया के केन्नेथ कौंडा मुख्य अतिथि बनें। 1976 में फ़्रांस के प्रतिनिधि -1977 में पोलैंड के प्रतिनिधि -1978 में आयरलैंड के प्रतिनिधि -1979 में ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि -1980 में फ़्रांस के प्रतिनिधि, 1981 में मैक्सिको -1982 में स्पेन -1983 में नाइजीरिया -1984 में भूटान -1985 में अर्जेंटीना -1986 में ग्रीस -1987 में पेरू -1988 में श्रीलंका -1989 में वियतनाम -1990 में मौरिशियस -1991 में मालदीव्स -1992 में पुर्तगाल -1993 में ब्रिटेन -1994 में सिंगापुर, 1995 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला गणतंत्र दिवस के समारोह के मुख्य अतिथि बनें वहीं 1996 में ब्राज़ील, 1997 में त्रिनिदाद, 1998 में फ़्रांस, 1999 में नेपाल, 2000 में नाइजिरिया, 2001 में अल्जीरिया, 2002 में मौरिशियस, 2003 में ईरान, 2004 में ब्राज़ील, 2005 में भूटान, 2006 में सऊदी अरब मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। 2007 में रुस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन, 2008 में फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सर्कोज़ी, 2009 में कज़ाकिस्तान, 2010 में कोरिया, 2011 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसिलो बम्बांग युधोयोनो, 2012 में थाइलैंड के प्रधानमंत्री यिन्गलक शिनवात्रा मुख्य अतिथि बनें।