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सौर ज्वालाओं के कारण लाल ग्रह पर मौजूद पानी सूखा

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा उस कारण का पता लगाने में सफल रही जिसके कारण मंगल पर जीवन की संभावनाएं खत्म हो गयी और यह एक निर्जन ग्रह के रूप में परिणित हो गया. मंगल पर पानी और जीवन की संभावनाओं की खोज में लगे नासा के अनुसंधानकर्ताओं ने खुलासा किया है कि मंगल पर जीवन की संभावनाओं को खत्म करने वाला सूरज ही है. सौर ज्वालाओं के कारण लाल ग्रह पर मौजूद पानी सूख गया और वायुमंडल भी नष्ट हो गया.

मंगल के निर्जन होने का रहस्य खुला
नासा की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अब मंगल के निर्जन होने का रहस्य खुल चुका है. सूरज ने ही इस ग्रह से पानी और वायुमंडल को छीन लिया और आखिरकार यह जीवनविहीन ग्रह के रूप में परिणित हो गया. नासा का कहना है कि इस खोज से लाल ग्रह के इतिहास, उसके विकास और जीवन की संभावनाओं की पूरी पहचान की जा सकती है. नासा की मानें तो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण मंगल जैसे हालात नहीं बन पाए. अगर पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र नहीं होता तो यहां भी मंगल के जैसे हालात होते. पृथ्वी के चारों ओर मौजूद चुम्बकीय क्षेत्र मैग्नेटोस्फेयर के कारण यह ग्रह सौर ज्वालाओं के कहर से बचा हुआ है. पिछले 200 साल में इस परत में 15 प्रतिशत का क्षय हो चुका है.

पृथ्वी पर सौर ज्वालाओं का कहर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस परत को नष्ट होने से बचाने के लिए कुछ ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पृथ्वी पर सौर ज्वालाओं का वैसा ही कहर टूटेगा जैसा मंगल पर हुआ था और यहां भी पानी के खत्म होते ही पृथ्वी भी मंगल के जैसा निर्जन ग्रह बन जाएगा. वर्ष 2014 से मंगल ग्रह के चक्कर लगा रहे नासा के यान मावेन द्वारा मुहैया करायी गयी जानकारी के अनुसार अरबों साल पहले मंगल का वायुमंडल पृथ्वी से भी घना था औ वहां नदी, झील और समुद्र होने के लिए माहौल पूरी तरह से अनुकूल था. उस समय मंगल के चारों ओर भी रक्षात्मक चुम्बकीय परत थी लेकिन किसी कारणवश मंगल की यह रक्षात्मक परत नष्ट हो गयी और उस ग्रह का पानी सौर ज्वालाओं के प्रभाव में पूरी तरह से सूख गया.