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महाराष्ट्र में सूखे से परेशान किसानों की मदद के लिए जनता ने दान में दिए 400 करोड़ रुपये

fadnavis

ऐसा देश जहां पर सरकार की आय आयकर से हमेशा से कम रही है और वहां लोग स्वेच्छा से अपनी जेबें खाली कर दें, ऐसा होना अविश्वसनीय लगता है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय ने बताया
जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय ने बताया कि लोगों ने स्वेच्छा से सरकार की जलयुक्त शिविर अभियान परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये का दान दिया है. इस योजना के तहत 25000 हजार गांवों में 2019 तक पानी पहुंचाया जाएगा.
70,000 करोड़ रुपये का सिंचाई घोटाला
यह सब भी तब हुआ है जब राज्य में 70,000 करोड़ रुपये का सिंचाई घोटाला पिछली सरकार के कार्यकाल में सामने आया था. पिछली सरकार कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की साझा सरकार थी. मुख्यमंत्री फडणवीस ने लोगों से अपील की थी
इस साल जुलाई में अपने जन्मदिन के मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने लोगों से अपील की थी कि उनकी सरकार को पैसे से मदद की जरूरत ताकि वह महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए योजना को कार्यान्वित कर सकें. लोगों ने दिल खोलकर दान देना आरंभ कर दिया
इस अपील के बाद, सरकार का कहना है कि लोगों ने दिल खोलकर दान देना आरंभ कर दिया. दान देने वालों में गांव वालों से लेकर किसान खुद, सरकारी कर्मचारी, बॉलीवुड स्टार जैसे अक्षय कुमार और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे से लेकर आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर सभी शामिल हैं.
किशोर तिवारी, जो कि वसंतराव नाइक शेट्टी स्वावलंबन मिशन (इसी सरकारी संस्था को पीड़ित लोगों तक लाभ पहुंचाने का काम सौंपा गया है) के प्रमुख हैं और योजना को जमीन पर उतार रहे हैं, ने बताया कि जिन लोगों की मदद की जा रही है वह भी पूरी तरह से पारदर्शी रखा गया है. तिवारी का दावा है कि अब सरकार ने बड़ी सिंचाई परियोजनाओं की जगह छोटी-छोटी सिंचाई परियोजनाओं पर जोर दिया है. इस तरह की योजनाओं में भ्रष्टाचार की गुंजाइश बहुत ही कम रहती है.
सरकार का कहना है कि पहले चरण में 6180 गांवों में काम की शुरुआत की गई और 1,20,485 छोटी परियोजनाओं को पूरा किया गया. करीब 3000 गांवों में 300 करोड़ रुपये के काम को किया गया और यह सब लोगों की भागीदारी के साथ किया गया. बता दें कि महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला विदर्भ से लेकर मराठवाड़ा तक फैला रहा है. इस साल अब तक 740 किसान आत्महत्या कर चुके हैं जबकि पिछले साल 574 किसानों ने आत्महत्या की थी. अब इस वर्ष तो इस योजना का लाभ दिखाई नहीं दिया क्योंकि इस वर्ष आसमान से पानी ज्यादा नहीं बरसा.