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देश में सबसे छोटा हिप रिप्लेसमेंट सफल, दो घंटे में मरीज को किया खड़ा

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देश में पहली बार सबसे छोटे हिप रिप्लेसमेंट का दावा दिल्ली के डॉक्टरों ने किया है। अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने हिप डिसप्लेसिया डिस्आर्डर से पीड़ित बौने मरीज के दोनों हिप बदलें हैं।
इस मरीज को डेल्टा मोशन सेरामिक-ऑन-सेरामिक टोटल हिप रिप्लेसमेंट इंप्लांट किया गया है। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती छोटी हड्डियां और मांसपेशियां थी, क्योंकि ऐसे मरीजों की रिकवरी सामान्य मरीजों की तुलना में बेहद धीमी होती है। खास बात यह है कि इस हिप रिप्लेसमेंट में कप का साइज 42 एमएम रहा जबकि सामान्य मरीजों में यह कप 48 एमएम का होता है। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक व ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. राजीव के मुताबिक, यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। क्योंकि मरीज महज चार फुट तीन इंच लंबा था। गंगटोक निवासी 34 वर्षीय दीप प्रधान हिप डिसप्लेसिया यानी कूल्हे का जोड़ खिसकने के असाधारण डिस्ऑर्डर (अमूमन बौनेपन मरीजों को होता है) से पीड़ित था।
पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर मरीज को पिछले दो महीनों से चलने-फिरने में बेहद दिक्कत हो रही थी। सितंबर के पहले हफ्ते में मरीज अस्पताल पहुंचा तो जांच में पाया कि हिप रिप्लेसमेंट आसान नहीं है। मरीज शुरुआत में अर्थराइटिस व कूल्हे की हड्डी में डिसप्लेसिया से पीड़ित था। तकलीफ अधिक रहने से सामान्य जीवन की गतिविधियां खत्म सी हो गयी थीं।
डॉ. राजीव के मुताबिक, बौनेपन के शिकार व्यक्तियों की छोटी शारीरिक संरचना के चलते उन्हें डिसप्लेसिया या डिजेनरेटिव हिप डिजीज जैसे बोन डिसआर्डर का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा अर्थराइटिस की भी आशंका होती है, जोकि कूल्हे के जोड़ पर पड़ने वाले घिसाव के कारण विकसित होता है और उक्त मरीज के साथ दोनों समस्याएं थीं।