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जजों की नियुक्ति में सरकारी दखल नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को करारा झटका देते हुए जजों की नियुक्ति में सरकार के दखल वाले राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) कानून को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है. कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद कोलेजियम प्रणाली बरकरार हो गई.

कोर्ट ने सर्वसम्मति से निर्णय सुनाते हुए संविधान में किए गए 99वें संशोधन को भी असंवैधानिक घोषित कर दिया. जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने एनजेएसी कानून रद्द करने का सर्वसम्मति से फैसला सुनाया.

न्यायपालिका की आजादी में दखल

पांच जजों ने कुल 1030 पन्नों के फैसले में कहा,'न्यायिक आजादी संविधान का बुनियादी ढांचा है. सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती, इसलिए एनजेएसी को रद्द किया जाता है. इससे न सिर्फ मुख्य न्यायाधीश की सर्वोच्चता कम हो रही थी बल्कि राष्ट्रपति की भूमिका भी कमतर हो रही थी. जजों के मामले में राष्ट्रपति कैबिनेट की सलाह पर काम नहीं करते बल्कि स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं.' कोलेजियम प्रणाली में खामियां हैं

पीठ ने माना,'कोलेजियम प्रणाली में कुछ खामियां हैं, जैसे पारदर्शिता की कमी. इस पर सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख तय की गई है.'