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नॉन नेट फेलोशिप को बंद करने का फैसला वापस, समीक्षा के लिए समिति गठित

Ministry-of-Human-Resource

मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने यूजीसी से उस आदेश को वापस लेने को कहा है, जिसमें नॉन नेट फेलोशिप को बंद करने का फैसला लिया गया था. मंत्रालय ने आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर गौतम बरुआ की अध्यक्षता में नेट एवं नॉन नेट फेलोशिप कार्यक्रम की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति भी गठित कर दी है. मंत्रालय ने यूजीसी अधिनियम के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि चूंकि फेलोशिप कार्यक्रम की समीक्षा हो रही है, इसलिए सरकार के नीतिगत फैसला लेने तक पुरानी व्यवस्था को जारी रखा जाए.

यूजीसी ने गत 7 अक्तूबर को नॉन नेट फेलोशिप बंद करने का फैसला लिया था. इसके विरोध में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. इस मामले की समीक्षा के लिए प्रोफेसर बरुआ की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है. समिति में अन्य सदस्य गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति सैयद बारी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री, कर्नाटक राज्य महिला विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. मीना राजीव चंदावर्कर और यूजीसी के सचिव हैं. समिति अपनी रिपोर्ट दिसंबर तक सौंपेगी.

स्टूडेंट्स ने समीक्षा कमेटी को किया खारिज
स्टूडेंट्स ने विश्वविद्यालयों में शोधार्थियों की छात्रवृत्ति के मुद्दे पर यूजीसी की गठित पांच सदस्यीय समीक्षा कमेटी को खारिज कर दिया. उनका कहना है कि यूजीसी के पत्र में आर्थिक आधार पर नॉन-नेट छात्रवृत्ति की समीक्षा की बात कही गई है, जो हमें कतई मंजूर नहीं है. जेएनयूजेएनयू छात्र संघ उपाध्यक्ष शेहला ने कहा कि यूजीसी को छात्रवृत्ति समीक्षा कमेटी के स्थान पर ‘बढ़ोतरी कमेटी’ गठित करनी चाहिए थी.