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एफएमसी का सेबी के साथ विलय, जेटली ने दिया औपचारिक स्वरुप

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देश में दो नियामकों के विलय की अपने किस्म की पहली पहल के तहत 60 साल पुरानी जिंस नियमन संस्था वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) का आज पूंजी बाजार नियामक सेबी के साथ विलय हुआ. और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस विलय को औपचारिक स्वरुप देने के लिए शेयर बाजार का पारंपरिक घंटा बजाया. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष यू के सिन्हा ने कहा कि जिंस बाजार की इकाइयों को नयी व्यवस्था में समायोजित होने में एक साल का समय मिलेगा क्योंकि उन्हें वैसे ही मानदंडों का पालन करना होगा जो इक्विटी बाजार में उनके समकक्षों पर लागू हैं. सिन्हा ने कहा ‘कोई बाधा न हो. कोई अंतराल न हो. यह सुनिश्चित करने के लिए हम कुछ समय दे रहे हैं ताकि वे नये नियमों के अनुकूल हो सकें.'
सेबी प्रमुख ने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया सोच-समझ तैयार की गयी है और नियामक ने सभी इकाइयों के फायदे के लिए एक विवरण पुस्तिका तैयार की है ताकि उन्हें विभिन्न नियमों और मानदंडों के बारे में अवगत कराया जा सके. सेबी के पूर्णकालिक सदस्य राजीव कुमार अग्रवाल सेबी अध्यक्ष की निगरानी में विलय की गयी इकाई जिंस बाजार के नियमन पर नजर रखेंगे. इस समारोह में आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा ‘सुधार की प्रक्रिया निरंतर जारी है. हम बजट का इंतजार नहीं करते हैं.'