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केंद्रीय मंत्रिमंडल की जीएसटी संशोधन विधेयक को मंजूरी

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संविधान संशोधन विधेयक, 2014 में राज्यसभा की प्रवर समिति की सिफारिशों के अनुरूप संशोधनों को मंजूरी दी. राज्यसभा की प्रवर समिति की सिफारिशों के अनुसार इसके तहत देशभर में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई 5 वर्ष तक की जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रवर समिति की राज्यों को मुआवजे संबंधी सिफारिश को मंजूरी दी गई. यह संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पहले ही 5 मई 2015 को पारित हो चुका है.

वस्तु एवं सेवा कर संविधान संशोधन विधेयक के प्रस्ताव

शराब और पेट्रो प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा.

राज्य 2 वर्ष तक 1 प्रतिशत अतिरिक्त कर वसूल सकेंगे.

जीएसटी लागू होने से राज्यों को होने वाले किसी भी तरह के राजस्व नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार 5 वर्षों तक करेगी.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विमान अपहरण निरोधक विधेयक 2014 में संशोधनों को मंजूरी दी. यह विधेयक 1982 के विमान अपहरण निरोधक कानून का स्थान लेगा.

इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूती प्रदान करने वाले उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2015 को भी मंजूरी दी जो 1986 के कानून का स्थान लेगा. इसमें केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण बनाने का प्रावधान है. इसमें किसी उत्पाद के कारण नुकसान होने की स्थिति में निर्माता के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान है.

मंत्रिमंडल ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास के लिए 20000 करोड़ रुपए के राष्ट्रीय निवेश एवं ढांचागत कोष (एनआइआइएफ) के गठन को भी मंजूरी दी. घरेलू निवेश को सुविधाजनक बनाने के लिए वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में विदेशी निवेश को मंजूरी प्रदान की गई. एआईएफ मूल रूप से भारत में गठित कोष हैं जिसका उददेश्य है पूर्व-निर्धारित नीति के मुताबिक निवेश के लिए भारतीय निवेशकों से पूंजी संग्रह (पूल-इन) करना है.

 

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