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भारत को शंघाई सहयोग संगठन का पूर्ण सदस्य के रुप में शामिल करने का निर्णय

pm modi

भारत और पाकिस्तान को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का पूर्ण सदस्य के रुप में शामिल करने का निर्णय किया गया. भारत को एससीओ का पर्यवेक्षक 2005 में बनाया गया था. कुछ प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद तकनीकी रुप से वर्ष 2016 में भारत इसका पूर्ण सदस्य बन जाएगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आभार व्यक्त करते हुए छह देशों वाले इस संगठन से कनेक्टिविटी बढाने, आतंकवाद से लडने और बाधाओं को दूर कर कारोबार अनुकूल वातावरण बनाने की दिशा में काम करने की पेशकश की.

भारत ने वर्ष 2014 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) पूर्ण सदस्यता का आवेदन किया था.

भारत की उर्जा और संसाधन की बढती जरुरतें और भारत में मौजूद एक बडा बाजार एससीओ क्षेत्र में समृद्धि लाने के लिए अहम भूमिका निभा सकता है.

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का पूर्ण सदस्य बनने के लिए इसके 6 सदस्यों- चीन, रुस, कजाखस्तान, किर्गिजस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के मंजूरी की जरूरत होती है. रूस सुरक्षा समूह की पूर्ण सदस्यता के लिए भारत का मुख्य समर्थक था.

शंघाई सहयोग संगठन

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है. इसकी स्थापना चीन, रूस, कज़ाख़स्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और उज़्बेकिस्तान के नेताओं द्वारा शंघाई में 15 जून 2001 को की गई थी.

रूस, चीन, कज़ाकस्तान, किर्गिस्तान, तज़ाकिस्तान और उज़बेकिस्तान एससीओ के स्थायी सदस्य देश हैं.

शंघाई सहयोग संगठन के छह सदस्य देशों का भूभाग यूरोशिया का 60 प्रतिशत है. यहां दुनिया के एक चौथाई लोग रहते हैं.

संगठन का मुख्य उद्देश्य

आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद व मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध संघर्ष करना.

आर्थिक सहयोग, ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना.

मध्य एशिया में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनज़र सहयोग बढ़ाना. 

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