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किसानों को कुल प्रत्यक्ष ऋण पिछले तीन वर्षों के औसत से नीचे नहीं दिया जाना चाहिएः आरबीआई

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसानों को दिया जाने वाला कुल प्रत्यक्ष ऋण पिछले तीन वर्षों के औसत के कम न हो. आरबीआई ने ये निर्देश सरकार द्वारा मौसम की प्रतिकूल स्थिति को देखते हुए प्रत्यक्ष ऋण में किसी भी कमी के प्रतिकूल प्रभाव पर चिंता व्यक्त करने को ध्यान में रख कर जारी किया है. इसके अलावा आरबीआई ने बैंकों को चेतावनी दी है कि प्राथमिक क्षेत्र के लिए निर्धारित लक्ष्य से कम दिए जाने वाले प्रत्यक्ष ऋण पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि बैंकों को पहले प्रत्यक्ष कृषि क्षेत्र का गठन करने वाले लाभार्थियों को 13.5 फीसदी प्रत्यक्ष ऋण के स्तर पर पहुँचाने के लिए प्रयास करना जारी रखना चाहिए. कृषि में प्रत्यक्ष ऋण को बढ़ाने के प्रयास में आरबीआई ने अप्रैल 2015 में प्राथमिकता क्षेत्र मानदंड़ों के तहत छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रत्यक्ष ऋण के लक्ष्य को संशोधित करते हुए इसे साल 2015-16 के लिए 7 फीसदी और 2016-17 के लिए 8 फीसदी कर दिया. सबसे वंचित किसानों, छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रत्यक्ष ऋण समायोजित निवल बैंक ऋण ( या क्रेडिट इक्विवैलेंट अमाउंट ऑफ ऑफ–बैलेंस शीट एक्सपोजर, जो भी अधिक हो) के करीब 6 फीसदी के आसपास रहा है.इसके अलावा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि के बीच का अंतर खत्म हो गया है और खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण इकाईयों के लिए ऋण कृषि का हिस्सा होगा. कृषि के लिए बैंकों का कुल लक्ष्य 18 फीसदी है.